कूड़े के पहाड़ तले दबकर 2 लोगों की हुई थी मौत; इससे दुखी 2 भाइयों ने कचरा घटाने की पहल की, 350 घरों से अब 80% कम निकल रहा है कूड़ा

2 भाइयों का ‘जीरो वेस्ट टारगेट’, 350 घर जुड़े, जिस कचरे को फेंक देते थे उससे हो रही 250 रु. कमाई

Dainik Bhaskar

Nov 26, 2018, 11:59 AM IST

आनंद पवार, नई दिल्ली. दिसंबर 2017 में गाजीपुर लैंडफिल साइट पर कूड़े के पहाड़ तले दबकर 2 लोगों को जान चली गई थी। एनजीटी ने राज्य सरकार और स्थानीय निकाय को कूड़े के निपटारे की स्थायी व्यवस्था बनाने का आदेश दिया था। साल भर बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। लेकिन इस घटना ने दो भाइयों को झकझोर डाला। उन्होंने महसूस किया कि यह मौतें हमारे कारण हुई हैं। क्योंकि कचरा तो हमारे घरों से ही निकलता है। ऐसे में उन्होंने घरों से निकलने वाला कूड़ा घटाने की योजना बनाई और फिर घर से ही जीरो वेस्ट प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया।

– वंसत विहार में रहने वाले विनीत और प्रियंका अग्रवाल के दो बेटे 14 साल के विहान और 11 वर्षीय नव अग्रवाल ने घरों से निकलने वाला कूड़ा घटाने की योजना बनाई।
– विहान ने रिसर्च के बाद जनवरी 2018 में घर से ही जीरो वेस्ट प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया। घर का कचरा सेग्रीगेट कर रिसाइकल करने के बाद वॉट्सएप ग्रुप बनाकर आसपास के लोगों को जोड़ा। – वंसत विहार, शांति निकेतन, वेस्ट एंक्लेव, आनंद निकेतन के 350 घर उनके साथ जुड़ चुके हैं।
– लैंडफिल साइट पर फेंकने के लिए अब इन घरों से सिर्फ 20% कूड़ा निकल रहा है। बाकी कचरा रिसाइकिल हो जाता है।
– उन्होंने रिसाइकल वेस्ट खरीदने वाली कंपनियों से संपर्क किया। कंपनी घरों से रिसाइकिल वेस्ट खरीदती है। इससे हर घर को प्रतिमाह 250 रु. भी मिल रहे हैं।
– दोनों भाइयों ने अपनी पहल आगे बढ़ाने के लिए ‘वन स्टेप ग्रीनर’ एनजीओ बनाया है। वे लोगों को जीरो वेस्ट के लिए जागरूक करने के लिए प्रेजेंटेंशन देते हैं। दिल्ली में 30 फीसदी प्रदूषण कूड़े से होता है।

ऐसे करें कूड़े का निस्तारण
सूखा कचरा:
घर में अलग-अलग बाल्टी में कागज/गत्ता, प्लास्टिक, कांच, धातु, टिन और ई-वेस्ट जमा करें। इसे कंपनी आपके घर से खरीद लेगी।

गीला कचरा: रोज निकलने वाली चायपत्ती, पेड़ों की पत्तियों को कंपोज्ड ड्रम्प में जमा कर 1 माह में खाद भी बनाई जा सकती है। इसका उपयोग बगीचे या पार्क में किया जा सकता है।

एनजीओ में दोस्त भी जुड़े…
एनजीओ में 15 वॉलिंटियर स्कूल के दोस्त हैं। विहान कहते हैं स्कूल के कुछ दोस्त मुझे कूड़े वाला बुलाते हैं। वह जैसे भी बुलाए, फर्क नहीं पड़ता। मैं स्कूल के लिए वेस्ट रिसाइकिलिंग का मॉडल बनाना चाहता हूं। हम स्कूल में सीख जाएं कि कैसे सेग्रीगेशन होता है तो घर से कचरा ही नहीं निकलेगा। मुझे कुछ स्कूल के शिक्षकों ने बुलाया है।

अब आगे…राजस्थान में भी प्रोजेक्ट को शुरू करने की योजना
विहान और उनके भाई नव कहते हैं, अब राजस्थान स्थित छोटी नांगल और बड़ी नांगल गांव और दिल्ली के छतरपुर के पास स्थित गदाईपुर गांव में इस प्रोजेक्ट को शुरू करने की योजना। यहां एक सेंटर बनाया जाएगा। जहां पर रिसाइकल वेस्ट के बदलने मिलने वाला पैसा पंचायत या एनजीओ के माध्यम से गांव के स्कूल, डिस्पेंसरी में सुविधाएं बढ़ाने या सोशल वेलफेयर के काम में लगाया जाएगा।

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